ऐ हमसफ़र
ख़्वाबों को अकेले देखना
और उन्हें सींचना
रातों को करवटें बदलते हुए सोचना
और सब पीछे छोड़ना
ऐ हमसफ़र
जो इस कश्मकश-सी ज़िंदगी में पाँव
रखना चाहो तो आना
आना हज़ारों बेताबियाँ, बेख़यालियाँ लिए
बेताबियों को ख़्वाबों संग पूरा कर
बेख़याल बातों के हिस्से रात रख देंगे
आना संग जुगनुओं-सी लौ लिए
शमशान-सी ज़मीन को भी
हम शमा-सा रौशन कर लेंगे
अपनी हारी हर जंग
पर मुस्कुराना
और संग हाथ थामे चलते जाना
ऐ हमसफ़र
जो इस उम्मीद-सी ज़िंदगी
में पाँव रखना चाहो तो आना