धुएँ मे उड़ रहा अस्तित्व हमारा

धुएँ मे उड़ रहा अस्तित्व हमारा


धुएँ मे उड़ रहा अस्तित्व हमारा,

जीवन जीने का न कोई आधार रहा,

भाग दौड़ मे ऐसे उलझे,

जैसे तारो के जाल मे फँसा पंछी मदद को कुहार रहा,

सहानुभूति देने को आतुर सब,

कोई पीड़ित की स्थिति न जान रहा,

मृत्यु हो या उत्पीड़ना हर कोई बस मतलब को पहचान रहा,

दो वक्त के नाम के लिए,

हर हद पार करने को तैयार है,

कुछ दिनों तक आवाज़ उठाकर अन्याय के खिलाफ,

फिर वही करने को तैयार है,

नजरो से जिनकी देह छलनी हो जाए,

वो भी नारी के सम्मान की गुहार लगाते नजर आते है,

फिर कही कुछ महीनों बाद,

फिर किसी नुक्कड़ पर वही करते नजर आते हैं,

दुसरो पे उंगलियाँ उठाकर,

खुद का दामन बचालोगे,

जलन की भावनाओं से तुम स्वयं को राख बना लोगे,

जलना है तो जलकर अपने गुणो से वातावरण भी सुगंधित करो,

ईश्वर के चरणों से लेकर मनुष्य के माथे तक का अधिकार पा लोगे,

— Ayushi Singh