क्यो इतनी परेशान हूँ

क्यो इतनी परेशान हूँ

थोड़ी हैरान हूँ, वक्त के हालातों दबी थोड़ी परेशान हूँ

औरों के लिए थोड़ी बोझ- सी बन गई

इसलिए आज खुद के पैरो पे खड़ी हुई हूँ ।।

यूँ तो बहुत समझदार हूँ पर अपनी ही गलतियों से लाचार हूँ

अकेला महसूस न हो कभी इसलिए खुद को महफूज रखा करती हूँ ।।

जिन्दगी से रूठी हुई एक नन्हीं - सी जान हूँ

टूट कर भी प्यार बाँटने वाली एक मीठी सी मुस्कान हूँ ।।

छोटी-छोटी बातों पे, कभी खुश तो कभी उदास हो जाया करती हूँ

कोई समझे न मुझे मैं इतनी complicated सी बन जाया करती हूँ ।

मेरी ताकत मेरी कमजोरी न बन जाए इसलिए खुद से भी लड़ जाती हूँ

अच्छे से कभी-कभी बुरी भी बन जाती हूँ||

सोचती हूँ बताऊ किसी खास को हाल-ए-दिल अपना

फिर मज़ाक बनने के उर से अंदर - ही- अंदर घुट जाया करती हूँ,

रोते-रोते भी मुस्कुरा दिया करती हूँ

मैं खुद को इतनी तसल्ली दे दिया करती हूँ ।।

थोड़ी हैरान जो हूँ , वक्त के हालातों दबे थोडी परेशान जो हूँ

एक दिन पहुँच ही जाऊँगी अपने मुकाम पे

लाख कोशिशों करलो मुझे गिराने की में उतनी ही सँवर जाऊँगी मैं अपने मुकाम पे पहुंच ही जाऊँगी ।।

— Ritika Rajput